रोमांटिक बात नही करने पर पति को पत्नी ने जमकर पीटा

करवाचौथ के पूर्व शराबी का झाड़ू से उतारी आरती
पुलिस के पास मामला जाने से पहले पड़ोसियों ने कराया सुलह
(संजल प्रसाद)......
वाराणसी। करवाचौथ के पूर्व ही एक पति की शामत आ गई, नाराज पत्नी ने रोमांटिक बात नही करने और पैसा नही देने का आरोप लगाकर अपने ही पति दिनेश को झाड़ू से जमकर पीट दिया। मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों पति-पत्नी शिकायत करने पुलिस तक जाने लगे। यह सब कुछ देखकर अंततः पड़ोसियों को हस्तक्षेप, बीचबचाव करना पड़ा तब जाकर बड़ी मुश्किल से दोनों के बीच सुलह हुई। गौरतलब है कि सुलह कराने वाले पड़ोसियों की माने तो पेशे से राजगीर मिस्त्री पति देर शाम नशे में बूत, मदहोश होकर लड़खड़ाते घर पहुंचा तो पत्नी उसे देखकर आग बबूला हो गई। कारण साफ था कि सुबह ही पत्नी ने पति से करवाचौथ के व्रत में खर्च होने वाले रुपये की मांग की तो पति ने लॉकडाउन होने से काम धंधा ठप्प होने और रुपये नहीं होने की बात कह कर पल्ला झाड़ते हुए घर से उसे अपशब्द बोलते हुए निकल गया था। नशे में बुत घर पहुंचा पति से पत्नी ने जब शराब खरीदने के लिए पैसे कहां से आये पूछा तो उसका पारा चढ़ गया और दोनों में जमकर बहसबाजी और लड़ाई होने लगी। कुछ पड़ोसी महिलाएं पहुंची और दोनों को समझा-बुझाकर और नसीहत देकर चली गई कि जिस बात का रास्ता प्यार से निकल सकता है उसे लड़ाई झगड़े से नही हल किया जा सकता है। पत्नी को समझ मे आ गया कि पड़ोसी महिलायें सही ही कह रहीं हैं। पति नशे में था और उसके पास कुछ रुपये भी थे, लेक़िन वह रुपये देने को तैयार नही था। इसलिए थोड़ी देर बाद पत्नी ने पति से दुलराकर, पुचकारते हुए थोड़ा रोमांटिक अंदाज में उससे बात करने लगी। लगभग दो दशक शादी के बीतने के बाद एक साथ जीवन का गुजर-बसर कर रहे राजमिस्त्री को यह सब अंदाज की असली वजह को समझते देर नही लगी। कारण भी स्पष्ट था कि जिस महिला का थोड़ी देर पहले ही पति ने दुर्गा, काली, चंडिका अवतार के रूप का दर्शन किया था भला वह कुछ देर बाद ही इतना प्यार कैसे लुटाने लगी। पति जब काफी देर तक पत्नी की रोमांटिक बातों की गिरफ्त में नही आया तो पत्नी ने सीधे पैसे की मांग कर बैठी। पैसा मांगते ही दोनों में फिर विवाद शुरू हुआ जो मारपीट में तब्दील हो गया। इसी बीच पत्नी का धैर्य जवाब दे गया और उसने झाड़ू उठाकर पति की जमकर पिटाई करने लगी। यह नजारा देख आसपास के लोग जुटे तो मामला पुलिस तक ले जाने की बात होने लगी। किसी तरह पड़ोसियों ने दोनों को समझा बुझाकर फ़िलहाल मामला शांत करा दिया है। बताते चले कि 4 नवंबर को करवाचौथ का पर्व है। मान्यता है कि इस पर्व का मुख्य मकसद यही होता है कि पत्नी अपने पति की लम्बी उम्र और उसकी खुशहाली की मंगलमय कामना करती है। खास बात यह है कि पत्नी करवाचौथ को धूमधाम से मनाने के लिये पैसे लेने की जिद पर अड़ी है तो वही पति पैसा नही होने की दुहाई दे रहा है। बताते चले कि पति की लम्बी आयु, यश और समृद्धि के लिए रखा जाने वाला यह करवाचौथ का मंगल पर्व 4 नंवबर को देश भर में मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को चांद को अर्ध्य कर व्रत तोड़ेंगी। करवाचौथ के दिन माता पार्वती और गणेश जी की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। जिसके बाद करवा चौथ की व्रत कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत का सबसे प्रचलित कथा बताया जाता है कि...एक ब्राह्मण के सात पुत्र थे और वीरावती नाम की इकलौती पुत्री थी। सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण वीरावती सभी भाइयों की लाडली थी और उसे सभी भाई जान से बढ़कर प्रेम करते थे। कुछ समय बाद वीरावती का विवाह किसी ब्राह्मण युवक से हो गया। विवाह के बाद वीरावती मायके आई और फिर उसने अपनी भाभियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखा लेकिन शाम होते-होते वह भूख से व्याकुल हो उठी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवाचौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। लेकिन चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।
वीरावती की ये हालत उसके भाइयों से देखी नहीं गई और फिर एक भाई ने पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा लगा की चांद निकल आया है। फिर एक भाई ने आकर वीरावती को कहा कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखा और उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ गई। उसने जैसे ही पहला टुकड़ा मुंह में डाला है तो उसे छींक आ गई। दूसरा टुकड़ा डाला तो उसमें बाल निकल आया। इसके बाद उसने जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश की तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिल गया। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवाचौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं। एक बार इंद्र देव की पत्नी इंद्राणी करवाचौथ के दिन धरती पर आईं और वीरावती उनके पास गई और अपने पति की रक्षा के लिए प्रार्थना की। देवी इंद्राणी ने वीरावती को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करवाचौथ का व्रत करने के लिए कहा। इस बार वीरावती पूरी श्रद्धा से करवाचौथ का व्रत रखा। उसकी श्रद्धा और भक्ति देख कर भगवान प्रसन्न हो गए और उन्होंनें वीरावती सदासुहागन का आशीर्वाद देते हुए उसके पति को जीवित कर दिया। इसके बाद से महिलाओं का करवाचौथ व्रत पर अटूट विश्वास होने लगा।


2020-11-06 09:42 am

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