IPL 2020: कार के साथ पोज देने की जगह पोंटिंग के साथ रहें पंत और शॉ-सुनील गावस्कर

नई दिल्ली। जैसे कि हम आइपीएल के इस सत्र के अंत में पहुंच चुके हैं और इसकी खासियत है यह है कि यह अंकों में हमें बता देता है कि फ्रेंचाइजियों ने जिन खिलाडि़यों पर करोड़ों खर्च किए हैं और उनका प्रदर्शन कैसा रहा है। उन्होंने कितने रन, कितने विकेट और कितने कैच पकड़े हैं, लेकिन क्रिकेट नंबरों की संख्या से ऊपर है।

कुछ ऐसे अनुभवी टीमों में मौजूद हैं जो युवा खिलाड़ियों के साथ समय बिताने और उनकी तैयारियों के बारे में अमूल्य सुझाव देने में मदद करते हैं, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। इस तरह की बातचीत के लिए इसे कभी भी रुपये, डॉलर और पाउंड में नहीं तोला जा सकता है, यह अनमोल है और यह युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी प्रगति में तेजी से मदद करता है।

जरा सोचिए कि युवा यशस्वी जायसवाल यह सीख रहे हैं कि कैसे स्टीव स्मिथ, बेन स्टोक्स, जोस बटलर, जोफ्रा आर्चर एक बड़े मैच की तैयारी करते हैं। जरा सोचिए कि देवदत्त पडीक्कल जैसे युवा विराट कोहली और एबी डिविलियर्स के साथ एक ही ड्रेसिंग रूम में या टीम बस से मैदान में आते-जाते हैं। मुरुगन अश्विन और रवि बिश्नोई अनिल कुंबले के साथ बैठते हैं और उनसे लाइन, लेंथ, शॉर्ट गेंदबाजी और किस बल्लेबाज के लिए कैसा क्षेत्ररक्षण रखना है, यह सब चीजें सीख रहे हैं।

अगर पृथ्वी शॉ और रिषभ पंत चाहते हैं कि उनके प्रदर्शन को मैदान पर फिर से याद किया जाए तो वे बड़ी कारों के साथ पोज देने की जगह रिकी पोंटिंग के साथ चिपके रहें, जो इस खेल के दिग्गज खिलाड़ी हैं। महेला जयवर्धने की मुंबई इंडियंस को देखें तो उनके युवा खिलाडि़यों ने दिखाया है कि वे किस तह से पारी को संभाल सकते हैं और बड़ा दबाव होने के बावजूद शांत रहते हैं।

आइपीएल उन लोगों के लिए एक महान क्रिकेट विश्वविद्यालय है जिनकी खेल में उच्च महत्वाकांक्षा है और वे कल से बेहतर करना चाहते हैं लेकिन इस साल यह अलग है क्योंकि न तो कोई दर्शक हैं और न ही खिलाड़ी टीम बस से मैदान के अलावा कोई यात्रा कर पा रहे हैं। अन्य ध्यान देने योग्य बात यह है कि मैदान पर उपलब्धि का जश्न। अब गेंदबाज द्वारा विकेट लेने वाला खास जश्न नहीं होता जिसमें खिलाड़ी का नाम लिया जाता है और न ही पचासा या शतक मारने के बाद ऐसा जश्न मनाया जा रहा है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता था।

आइपीएल में पिचों की गुणवत्ता को लेकर भी बातचीत होनी चाहिए। तीनों मैदानों में क्यूरेटरों ने बहुत ही शानदार काम किया है और पिचों को देखते हुए आइपीएल में सबसे रोमांचक मैच खेले गए हैं। प्लेऑफ में पहुंचने वाली दो टीमें ऐसी हैं तो कभी भी यह खिताबी ट्रॉफी नहीं जीत पाई हैं और हमें नए चैंपियन को देखने के लिए इंतजार करना होगा।


2020-11-01 11:56 am

खेल जगत

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